🗺️
India States
राज्य समाचार चुनें
Tap any state on the map
J&K Ladakh H.P. Punjab CH Uttarakhand Haryana DL Uttar Pradesh Rajasthan Bihar SK Arunachal P. Assam NL MN MZ TR Meghalaya W.Bengal Jharkhand Madhya Pradesh Chhattisgarh Odisha Gujarat DD DNH Maharashtra Goa Karnataka Telangana Andhra P. Tamil Nadu Kerala PY LK A&N
Powered by Pulse of the Nation

खबर लोड हो रही है...

👤 लेखक
📅 तारीख
💬 0 टिप्पणी
👁️
📢 शेयर करें 📘 Facebook 🐦 Twitter 💬 WhatsApp ✈ Telegram
📰
इमेज लोड हो रही है...

एसकेडी विश्वविद्यालय में सात दिवसीय हनी बी प्रशिक्षण शिविर का हुआ भव्य समापन

किसानों ने सीखी आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीकें, स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के नए अवसरों पर हुआ मंथन

हनुमानगढ़, 3 जुलाई 2026 । शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में अग्रणी श्री खुशाल दास (एसकेडी) विश्वविद्यालय, हनुमानगढ़ में राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (National Bee Board) द्वारा वित्तपोषित “एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केन्द्र” के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय हनी बी (मधुमक्खी पालन) प्रशिक्षण शिविर का गुरुवार को सफलतापूर्वक एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। यह विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 11वां मधुमक्खी पालन प्रशिक्षण शिविर था, जिसमें राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए किसानों, युवाओं एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए आधुनिक मधुमक्खी पालन की तकनीकों का व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

विश्वविद्यालय परिसर में 27 जून से 3 जुलाई 2026 तक आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, सीकर, टोंक, सवाई माधोपुर, प्रतापगढ़, भरतपुर, कोटपूतली-बहरोड़ तथा नागौर सहित विभिन्न जिलों से आए 25 प्रगतिशील किसानों एवं प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, विद्यार्थियों तथा ग्रामीण युवाओं को मधुमक्खी पालन की नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना, कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना तथा खेती के साथ अतिरिक्त एवं स्थायी आय के स्रोत विकसित करने के लिए प्रेरित करना था।

 

समापन समारोह के दौरान श्री गुरु गोबिंद सिंह चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि वर्तमान समय में कृषि के साथ सहायक व्यवसाय अपनाना किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। मधुमक्खी पालन ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम लागत में शुरू कर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जो किसान नई तकनीकों, नवाचारों और वैज्ञानिक सोच को अपनाते हैं, वही भविष्य में सफल एवं आत्मनिर्भर उद्यमी बनते हैं।

उन्होंने कहा कि आज के समय में शुद्ध एवं प्राकृतिक शहद की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शहद का उत्पादन किसानों के लिए रोजगार और आय का एक उत्कृष्ट माध्यम बन सकता है। उन्होंने शहद को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रायः यह गलत धारणा फैलाई जाती है कि जमने वाला शहद नकली होता है, जबकि वास्तविकता यह है कि प्राकृतिक एवं शुद्ध शहद का जमना उसकी गुणवत्ता एवं प्राकृतिक संरचना का संकेत हो सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन अपनाकर सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं तथा अपने उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखें।

 

समापन समारोह के मुख्य अतिथि रायसिंहनगर विधायक सोहन नायक ने अपने संबोधन में कहा कि मधुमक्खी पालन केवल शहद उत्पादन तक सीमित व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में वृद्धि करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम है। जिसमें मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने एसकेडी विश्वविद्यालय द्वारा किसानों को व्यावहारिक एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार की दिशा में नई प्रेरणा प्रदान करते हैं।

 

प्रशिक्षण शिविर के दौरान विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को मधुमक्खियों की विभिन्न प्रजातियों की पहचान, कॉलोनी प्रबंधन, बॉक्स प्रबंधन, रानी मधुमक्खी संरक्षण एवं संवर्धन, शहद संग्रहण, शहद की गुणवत्ता परीक्षण, मोम, परागकण (पोलन), रॉयल जेली एवं अन्य मधुमक्खी उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन संबंधी तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं, अनुदान एवं वित्तीय सहायता की जानकारी भी प्रदान की गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि मधुमक्खियां केवल शहद उत्पादन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि फसलों के परागण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मधुमक्खियों द्वारा बेहतर परागण होने से फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे किसानों की आय में प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। शिविर समन्वयक डॉ. मंगला राम बाजिया ने प्रशिक्षण की जानकारी देते हुए बताया कि सात दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया। मधुमक्खी पालन से संबंधित सभी आवश्यक उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया तथा प्रतिभागियों को बॉक्स संचालन, मधुमक्खियों की देखभाल, रोग एवं कीट नियंत्रण, शहद निष्कर्षण एवं सुरक्षित भंडारण की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।

 

 

उन्होंने कहा कि यदि किसानों में सीखने की ललक, सकारात्मक सोच और कुछ नया करने का साहस हो तो वे सीमित संसाधनों के बावजूद आत्मनिर्भर बन सकते हैं। मधुमक्खी पालन ऐसा व्यवसाय है जिसे कम निवेश में प्रारंभ कर नियमित एवं बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। समापन समारोह के दौरान सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्ण होने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा मधुमक्खी पालन में उपयोग आने वाली विशेष बी-कीट (Bee Kit) भेंट कर सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारीगण, शिक्षक, शोधार्थी, कृषि विशेषज्ञ, प्रशिक्षण दल एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

लेखक / Author
pulseofthenation
pulseofthenation की संपादकीय टीम उत्तर प्रदेश और देश-विदेश की ताजा, विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुंचाती है।
📰 संबंधित खबरें सभी देखें
WhatsApp Image 2026-04-28 at 18.27.09 (1)
WhatsApp Image 2026-04-28 at 18.27.08 (1)
WhatsApp Image 2026-04-28 at 18.27.07 (1)
ताजा खबरें
विज्ञापन
🌤 मौसम — लखनऊ, UP
--°C
लोड हो रहा है...
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
--%
नमी
-- km/h
हवा
--°C
महसूस
विज्ञापन
📂 श्रेणियाँ
🏷️ लोकप्रिय टैग्स